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दुनिया में सबसे ज्यादा अंडे खाने वाले देश: भारत अभी भी पीछे, रिपोर्ट में चौंकाने वाले आंकड़े

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रैबोबैंक की ग्लोबल रिपोर्ट के अनुसार मैक्सिको और जापान दुनिया में सबसे ज्यादा अंडे खाने वाले देश हैं, जहां प्रति व्यक्ति 300 से अधिक अंडे सालाना खाए जाते हैं। जानिए भारत इस मामले में किस स्थान पर है।

आज की तेज रफ्तार जिंदगी में अगर किसी एक फूड आइटम को सबसे ज्यादा उपयोगी, सस्ता और पोषण से भरपूर माना जाता है, तो वह है अंडा। सुबह के नाश्ते से लेकर दिन और रात के खाने तक, अंडा हर समय लोगों की थाली में जगह बना चुका है। यही वजह है कि दुनियाभर में इसकी खपत लगातार बढ़ रही है। हाल ही में आई Global Egg Industry Outlook 2025 रिपोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि किन देशों में अंडा सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है और इस दौड़ में भारत कहां खड़ा है।

मैक्सिको और जापान सबसे आगे

रिपोर्ट के मुताबिक, Mexico और Japan ऐसे देश हैं, जहां के लोग अंडे खाने के मामले में दुनिया में सबसे आगे हैं। इन देशों में प्रति व्यक्ति सालाना अंडे की खपत 300 से भी ज्यादा है। यह आंकड़ा बताता है कि वहां अंडा सिर्फ एक विकल्प नहीं, बल्कि रोजमर्रा की डाइट का अहम हिस्सा बन चुका है।

अगर वजन के हिसाब से देखा जाए, तो इन देशों में एक व्यक्ति सालभर में करीब 20 से 24 किलो अंडे खा जाता है। खासतौर पर मैक्सिको में अंडे को हर मील में शामिल किया जाता है, चाहे वह नाश्ता हो, लंच हो या डिनर। वहीं जापान में अंडे से बनने वाली डिशेज की विविधता और गुणवत्ता पूरी दुनिया में मशहूर है।

अंडा क्यों बना सबसे लोकप्रिय फूड

विशेषज्ञ मानते हैं कि अंडा अपनी पोषण क्षमता और आसान उपलब्धता के कारण हर वर्ग के लोगों के बीच लोकप्रिय है। इसमें मौजूद प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स शरीर के लिए बेहद जरूरी होते हैं। यही वजह है कि फिटनेस के प्रति जागरूक लोग, जिम जाने वाले युवा, बच्चे और कामकाजी लोग सभी इसे अपनी डाइट में शामिल करते हैं।

अंडे से कई तरह के व्यंजन जल्दी तैयार किए जा सकते हैं, जिससे यह व्यस्त जीवनशैली में और भी उपयोगी बन जाता है। कम लागत में बेहतर पोषण देने वाला यह फूड आज ‘सुपरफूड’ के रूप में देखा जा रहा है।

भारत की स्थिति क्या है

अगर भारत की बात करें तो India अंडा उत्पादन के मामले में दुनिया के शीर्ष देशों में शामिल है, लेकिन खपत के मामले में अभी भी पीछे है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, भारत में प्रति व्यक्ति सालाना अंडे की खपत लगभग 100 से थोड़ा अधिक है, जो वैश्विक औसत से कम मानी जाती है।

हालांकि राहत की बात यह है कि पिछले कुछ वर्षों में भारत में अंडे की खपत तेजी से बढ़ी है। एक दशक पहले जहां यह संख्या काफी कम थी, वहीं अब इसमें लगातार वृद्धि देखी जा रही है। यह बदलाव लोगों में बढ़ती स्वास्थ्य जागरूकता और पोषण के प्रति रुचि को दर्शाता है।

किन राज्यों में सबसे ज्यादा खपत

भारत के अलग-अलग राज्यों में अंडे की खपत में काफी अंतर देखने को मिलता है। दक्षिण भारत के Andhra Pradesh और Tamil Nadu जैसे राज्यों में अंडा खाने की मात्रा सबसे ज्यादा है। यहां सरकारी योजनाओं और मिड-डे मील जैसी पहल के कारण भी अंडे का उपयोग बढ़ा है।

इन राज्यों में अंडा केवल घरों तक सीमित नहीं है, बल्कि स्कूलों और सरकारी कार्यक्रमों के जरिए भी बच्चों और युवाओं की डाइट का हिस्सा बन चुका है।

बढ़ती खपत के पीछे के कारण

भारत में अंडे की खपत बढ़ने के कई कारण हैं। सबसे बड़ा कारण इसकी कीमत है। चिकन और मटन की तुलना में अंडा काफी सस्ता होता है, जिससे यह आम लोगों की पहुंच में रहता है।

इसके अलावा फिटनेस और हेल्थ के प्रति बढ़ती जागरूकता भी एक बड़ा कारण है। जिम जाने वाले लोग और खिलाड़ी अपनी डाइट में अंडे को प्राथमिकता देते हैं। वहीं, इसकी आसान उपलब्धता भी इसे लोकप्रिय बनाती है। छोटे दुकानों से लेकर बड़े सुपरमार्केट तक, अंडे हर जगह आसानी से मिल जाते हैं।

पोषण और सेहत का मजबूत स्रोत

डॉक्टरों और पोषण विशेषज्ञों के अनुसार, अंडा शरीर के लिए जरूरी प्रोटीन का एक बेहतरीन स्रोत है। इसमें मौजूद अमीनो एसिड, विटामिन बी12 और अन्य पोषक तत्व शरीर को ऊर्जा देने के साथ-साथ मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं।

यही वजह है कि बच्चों के विकास से लेकर बुजुर्गों की सेहत तक, हर उम्र के लोगों के लिए अंडा फायदेमंद माना जाता है।

भविष्य में बढ़ेगी खपत

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत में अंडे की खपत और बढ़ेगी। बदलती लाइफस्टाइल, बढ़ती आय और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता इस दिशा में अहम भूमिका निभाएंगे।

सरकार और निजी क्षेत्र की पहल भी इस खपत को बढ़ाने में मदद कर सकती है, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में जहां अभी भी पोषण की कमी एक बड़ी चुनौती है।

निष्कर्ष

दुनिया में जहां मैक्सिको और जापान जैसे देश अंडा खपत में सबसे आगे हैं, वहीं भारत धीरे-धीरे इस दिशा में आगे बढ़ रहा है। बढ़ती जागरूकता और उपलब्धता के साथ आने वाले समय में भारत भी इस सूची में ऊपर आ सकता है।

अंडा केवल एक साधारण खाद्य पदार्थ नहीं, बल्कि बेहतर स्वास्थ्य और पोषण का एक मजबूत आधार बन चुका है, जो हर वर्ग के लोगों की जरूरतों को पूरा करता है।

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